महफ़िल-ए-ख़्वाजगाने चिश्त व जलसा बयादगार
साग़र मियां रह अक़ीदत के साथ मनाया गया
शाहजहांपुर- शहर में एक बार फिर रूहानियत का खुशनुमा माहौल देखने को मिला, जब मोहल्ला ताजू खेल स्थित मास्टर फैयाज़ हसन सागरी के आवास पर ग़रीब नवाज़ फाउंडेशन की जानिब से महफ़िल-ए-ख़्वाजगाने चिश्त व जलसा बयादगार साग़र मियां रह अक़ीदत के साथ मनाया गया.
महफ़िल का आगाज़ तिलावत क़ुरआन पाक से हुई,उसके बाद विर्द दरूद हुवा और शायरों व नातख्वां ने अपने बेहतरीन कलाम पेश कर महफ़िल को नूरानी बना। “या ख़्वाजा” और “या ग़रीब नवाज़” की सदाओं से पूरा माहौल सूफियाना ही गया और हर शख्स रूहानी कैफियत में डूबता नजर आया।
महफ़िल की रौनक उस वक्त और बढ़ गई, जब मुख्य अतिथि दरगाह हजरत सागर मियां रह. सण्डीला के सज्जादाशीन जनाब मुईज़ुद्दीन अहमद साग़री चिश्ती निज़ामी महफ़िल में पहुंचे। उनकी आमद पर मौजूद अकीदतमंदों ने इस्तकबाल किया।मुख्य अतिथि जनाब मुईज़ुद्दीन अहमद साग़री चिश्ती निज़ामी अपने बयान में औलिया-ए-किराम की तालीमात पर रोशनी डालते हुए इंसानियत, भाईचारे, मोहब्बत और खिदमत-ए-ख़ल्क़ का पैग़ाम दिया। उन्होंने कहा कि औलिया की जिंदगी इंसान के लिए एक मुकम्मल रहनुमा है, जो सब्र और दूसरों के लिए जीने की सीख देती है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में समाज को औलिया-ए-किराम की शिक्षाओं को अपनाने की सख्त जरूरत है, ताकि समाज में अमन-चैन और भाईचारा कायम रह सके।
इस अवसर पर सूफ़ी नसीम अली हनीफी ने कहा कि यह महफ़िल सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि अकीदत और चिश्तिया सिलसिले की बेशकीमती विरासत को जीवंत रखने का एक जरिया है।
कार्यक्रम के अंत में सलातो-सलाम पेश किया गया और मुल्क व मिल्लत की सलामती, अमन-चैन और तरक्की के लिए विशेष दुआएं मांगी गईं। इसके बाद लंगर-ए-आम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की।
कार्यक्रम में ग़रीब नवाज़ फाउंडेशन के ज़िला अध्य्क्ष
मास्टर फैयाज़ हसन साग़री गुलज़ार शाहजहांपुरी,खलीक़ अहमद शौक शाहजहांपुरी,फ़य्याज़ उद्दीन सागरी रहबर शाहजहांपुरी क़ाज़ी हाफ़िज़ मुकीम सागरी, ज़ईम हसन सागरी,आसिफ हुसैन सागरी,काशिफ नसीमी, अब्दुल वहीद सागरी आदि समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

