Dedicated to the memorable Peer O Murshid of Hazrat Sagar Miyan Rahema on the day of 24th Rabiul Awwal youm e
Wisal ,
सुन ले ज़माना सुन ले ये क़ौल ए आरिफ़ाना,
मैं हूं मुरीद उनका ,वो मुरशिद ए ज़माना,
क्यों दर्द में कमी है, क्यों आंख में नमी है,
फ़िर इख़्तियार कीजे अन्दाज़ ए यूसुफ़ाना,
सब कुछ भुला के साग़र ये याद रह गया है,
इक नाम शाहे साग़र इक उनका आस्ताना
इक नाम शाहे साग़र इक उनका आस्ताना । .......................
